तेरी आँखें ही मेरा गोलोक, मेरा साकेत धाम/
आँखें मूँदो, हो जाएँगे सुफल सारे मनोरथ,
करने को कुछ नहीं, जपो बस हरिनाम//
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आँखें खुलीं तो जग सारा' सनम' की तस्वीर है/
आँखें बंद कीं तो हरिनाम ही तकदीर है//
" मेरी rachnaaye हैं सिर्फ अभिव्यक्ति का maadhyam , 'एक कहानी samjhe बनना फिर जीवन कश्मीर महाभारत ! "
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