Saturday, May 9, 2026

अल्काजों से गजल ढलती है ( शेर)

मजबूरियाँ मोहब्बत की होती हैं क्या, कोई मुझसे पूछे/
वीरानियाँ दिल की होती हैं क्या, कोई मुझसे पूछे/
सज-धज के साथ सनम मौजूद रहते सीने में,
अल्फाजों से गजल ढ़लती है कैसे, कोई मुझसे पूछे//

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सनम का होना तो एक बहाना है/
गजल तो खुदको खुद से ही चुराना है/
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ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!