रात हो गई है ,हम भी जाग रहे हैं ,
इस आस में कि जागोगे तो रूबरू होंगे ,
हम -तुम मिल बैठेंगे साथ -साथ ,
रास्ते -मंजिले -इश्क के आबाद होंगे।
मरहले शख्त हों या आसान ,जागते ही रातें बीतेंगी ,
तुम मुश्किल में होंगे ,तो हम किस दिन काम आएँगे।
तुमसे दिल की बात कहना भी मुश्किल ,
करना तो और भी मुश्किल ,जाने क्या मतलब समझोगे।
हमको भी सुना देना अपनी प्रेम -कहानी ,
सुरूर में आकर थोड़ा -बहुत लड़खड़ायेंगे ,
बात खुद भी समझ करके तुम्हें भी समझायेंगे।
आ जाओ मेरे पास तो दूरियां नजदीकियाँ बन जाएँ ,
दिल से दुआ निकले और सजदे में हम हो जाएँ।
मौका निकालो तो हम -तुम एक साथ चलें ,
हमारे शहर की दूरियां कम हो जाएँ ,
हम होकर बेफिक्र आज़ाद हो जाएँ
जो तुम -हम हो जाएँ।
बीत जाएगी ये रात हौले -हौले अगर ये रात भी
सुबह हम -तुम कहाँ जल्दी जाग पाएंगे।
होकर तेरे ख्यालों में गुम सुध तेरी आएगी ,
हम वादियों में भटकेंगे और तुझे भी भटकायेंगे
आ जाओ तो तुम हम हो जाएँ।
पहले मेरे पास आओ तो तुम्हे अपने और पास समझूँ
तुमको समझूँ और अपना जानूं आ जाओ तो तुम हम हो जाएँ।
दूरियां घट जाएंगी जब तेरे शहर से मेरे शहर बीच ,
तुम आओगे ,हाले -दिल का फलसफा मुझसे बाँट सकोगे ,
और अकेले मेरे पास आ सकोगे ,आ जाओ तो तुम हम हो जाएँ।
एक दुसरे का हाल सुनें और सुनते ही रहें ,
सारी रात चर्चे में तुम रहो ,और तुम्हारी यादें मेरे साथ चलें ,
फिर पलट के ,आ जाओ तो तुम हम हो जाएँ।
बरसेंगे बादल कब ,चलेगी पुरवाई कब तक
हम तुम पास -पास ,साथ -साथ होंगे कब तक।
इस रात की तन्हाई में तुम मुझे आवाज डोज कब तक
खिंच कर तेरी ओर चले आएंगे ,दिल में तुझे बसा कर
अपनी भी बना लेते ,एक बार अगर आ जाओ तो तुम हम हो जाएँ।
इज़्ज़त -अफजाई तेरी करता ,अगर तेरी मर्द मां करने देती ,
तुझे और तेरी मोह्हबत को बाला -ए -ताक न रखता ,
तेरे बाप के करीब तुझे लाता ,अपनी बताता ,
और एक चाय तेरे हाथों से बनवा कर पीता ,तुझे अपनी साकी बनाता ,
रहे -जन्नत में तुझे अपना दिलदार बनाता ,अब आ भी जाओ तुम हम हो जाएँ ..
शोरीशे -अलम हवा हो जाये जो हम तुमनेकबंदो की तरह एक साथ चलें ,
तुम बनो -बनो न बनो ,मुझे तेरी गरज नहीं ,बन के सुनो न सुनो ,
तुम्हारी मर्जी ,बस एक बार आ जाओ तो तुम हम हो जाएँ।
------------राजीव -----रत्नेश ----------

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