तुम चाँद हो ,बाकी सब सितारे ,तुम चाहो तो भोरे में आ जाओ ,
आ जाओ करीब ,सुबह -सुबह सैरे -गुलशन को चलें।
शोर न करो ,निशाना चूका है तुम्हारा ,हमको आजमाओ तो चलें ,
दूर न जाओ हमसे ,निशाना फिर से हमें बनाओ तो चलें।
आ कर के फिज़ा की मनहूसियत मिटाओ तो चलें ,
हमें तुम्हीं से निस्बत है ,निशाना नज़रों का चलाओ तो चलें।
पास मेरे आकर भी ,तुम सहमी -सहमी रहती हो ,
पुकारो दिल से हमें ,दो कदम साथ -साथ तो चलें।
सूरज की पहली रश्मि के साथ गुनगुनाओ तो चलें,
पास आकर बैठो ,मोह्हबत को खेल न समझो तो चलें।
तुम 'रतन 'के पास ,ख्वाबों में ही तो आती हो,
दीवाना हम भी बन जायेंगे ,तुम मौका तो निकालो।
----------राजीव रत्नेश -----------------

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