दूर न जाओ ,मेरे और करीब आ जाओ ,
हाले -दिल मेरा सुनो ,जाग उठे नसीब आ जाओ।
दिल की गली सुनसान है मेरी ,आ जाओ ,
बख्शी है अल्लाह ने शोहरत ,आ जाओ।
मेरी दुनिया में आकर ,अब लौट न जाओ ,
तहे -दिल से शुक्रिया ,मिला है सलीब आ जाओ।
दिलफरेब है तू ,तेरी याद सताती है मुझे ,
तू भाती है मुझे ,मेरे नसीब आ जाओ
'रतन 'पे मेहरबानी तेरी ,रात हसीन आ जाओ,
पास आकर ,करने को सितम आ जाओ।
---------राजीव रत्नेश -----------------

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