Monday, February 17, 2025

KAR SITAM JAO.

दूर न जाओ ,मेरे और करीब आ जाओ  ,

हाले -दिल मेरा सुनो ,जाग उठे नसीब  आ जाओ। 

दिल की गली सुनसान है मेरी ,आ जाओ ,

बख्शी है अल्लाह  ने शोहरत ,आ जाओ। 

मेरी दुनिया में आकर ,अब लौट न जाओ ,

तहे -दिल से शुक्रिया  ,मिला है सलीब आ जाओ। 

दिलफरेब है तू ,तेरी याद सताती है मुझे ,

तू भाती है मुझे ,मेरे नसीब आ जाओ  

'रतन 'पे मेहरबानी तेरी ,रात हसीन आ जाओ,

पास  आकर ,करने को सितम आ जाओ। 

---------राजीव रत्नेश ----------------- 

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