Monday, February 17, 2025

TEREE KAHANEE ,YAAD HAI ZABANEE .

किसी से क्या कहते ,तुमसे ही कहते हैं बात तुम्हारी ,

दिल को भा गयी बदगुमानी भी तुम्हारी। 

तेरे इसरार पे ,मेरी सौंपी चॉकलेट ,तेरे मुँह में गयी ,

वफायें कम ,तेरा शुक्रिया न कहना ,मेहरबानी तुम्हारी। 

रुखसारों से हौले -हौले मुस्कराना ,इर्द -गिर्द मडराना ,

मेरे आगोश से निकल कर ,फिर पास आने का इरादा। 

अपनी 'हाँ 'को 'ना 'से छिपाना ,तौबा भी रही तो मेरी ही ,

आता है रह -रह के वो मंज़र रात का सुहाना। 

कभी छिपना ,कभी परदा हटा के मुझे निहारना ,

छिपा न सकी तुम ,थोड़ी भी अपनी इज़हारे -तम्मना। 

कहानी पूरी हो जाए ,बिना जिक्रे -जोशे -जवानी के ,

ऐसी तो न देखी ग़ज़ल ,न सुनी ऐसी कोई कहानी। 

अब तो सूरज ढ़लान पे आने -आने को है ,

उतर आ खाट से ,हाथ के डंडे के सहारे। 

तेरी सरगोशियों से एक तूफान बपा होता है ,

बदनीयती तेरी ,मैं भी सबसे कह दूंगा जबानी। 

असर तेरी बात का ,मुझ पर यूँ है ,मेरी तो 'न 'है 

वो बात भी महफ़िल में सुना देंगे ,जो न सुनानी है। 

आ जाओ एक बार फिर से पहलू में सरे -महफ़िल 

तेरा किस्सा ,तेरी कहानी 'रतन' को याद है ज़बानी। 

-----------राजीव रत्नेश --------------- 

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