Saturday, May 9, 2026

कशमकश ( गजल)

कशमकश  ( गजल)
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तुम मेरी जिन्दगी में बहार बन के आए/
इंतजार में तेरे हमने पलक- पाँवड़े बिछाए/

अभी तो इब्दिता- ए- इश्क है, और तू छैल- छबीली,
तेरे लिए फूल हमने भी दिल ही दिल में खिलाए/

तू सबसे अलग होगी, ख्यालों के भी परे होगी,
दिल को तेरा इस्तकबाल करने को समझाए/

न तुम दूर कहीं जाना, न गैर अपने को समझना,
तेरे लिए सितारों से जिया माँगी, राह में तेरे सितारे बिछाए/

तू निकल चुकी है अब, नुक्कड़ तक आ पहुँची है,
आ ही गई समझो, दिल को अहसास ये दिलाए/

जबरन खींच के तुझे, लेना पड़ा है इक-इक चुंबन भी,
मर्जी से अपनी तू कभी, पास भी न फटक के आए/

आती है बार- बार मेरे कमरे में किसी-किसी बहाने,
चाय पूछती है और पूछती है,' रातों को क्या सो पाए?'

कैसे कहूँ उससे,' आँखों की नींद, दिल का सुकूं तूने छीना'
बात उससे क्या बढ़ाना, कह दूँ,' तेरे बिना सो नहीं पाए'/

हम पूछ कर कुछ उससे, काहे को बात बढ़ाएँ,
खुद ही मीठी-मीठी चितवन से वो दर्दे- दिल बढ़ाए/

नजर उसकी उतार के, फितरे का पैसा किसे दें?
कोई पास' रतन' के, कुछ माँगने तो आए//

              राजीव रत्नेश
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हम तुझे लेकर भरी महफिल से चले जाएँगे,
हर सितम जमाने के, सहने को तैय्यार हैं/
आ जाना तुम तो बस प्यार से राहों में,
थामने को तेरा हाथ, हर हाल हम बेकरार हैं//

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आलम महफिल का आशिकाना होगा/
सुरूरे- जाम में तेरा हर दीवाना होगा/
तकदीर से माँगा है तुझे हमने,
सिवा कुदरत के कौन हमें तेरा नजराना देगा//

                राजीव रत्नेश
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