कुछ इस तरह तेरा इंतजार करता हूँ
---- राजीव रत्नेश
कुछ इस तरह तेरा इंतजार करता हूँ,
जैसे पाँव के नीचे जमीन तलाश करता हूँ/
तेरी आहट का यकीं दिल में लिए हर पल,
बंद आँखों से तेरा दीदार करता हूँ/
रात ढ़लती है मगर नींद नहीं आती,
चाँद से बैठा हुआ तेरा सवाल करता हूँ/
तू मिले या न मिले, ये बात अपनी है,
हर घड़ी तेरा ही मैं इंतजार करता हूँ/
दूरियाँ बढ़ती गईं, कम न हुई चाहत,
फासलों में भी तेरा इंतरवाब करता हूँ/
जिस तरफ देखूँ, तेरा ही अक्स मिलता है,
आईने से भी तेरा इकरार करता हूँ/
जिंदगी जब भी मुझे तन्हां खड़ी मिली,
तेरी यादों को गले लगा कर प्यार करता हूँ/
राह मुश्किल है मगर हौसला नहीं टूटा,
तेरी उम्मीद में खुद को तैय्यार करता हूँ/
कभी खामोश हवाओं से तेरा पता पूछूँ,
कभी सितारों में तेरा इंतजार करता हूँ/
' रतन ' ये इश्क का कैसा सिलसिला है,
खुद से पहले तेरा इंतजार करता हूँ/
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