मुबारकबाद ...!!! ( कविता)
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( आयुष्मती सन्नो एवं आयुष्मान गिरीश की शादी के
खुशनुमा मौके पर एक सरशार खास याद)
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ऐ भोली और मासूम दुन्हन,
शादी मुबारक हो/
ये शाम की महफिल, चे मौजें,
हर आजादी मुबारक हो/
हर लम्हा चैन से गुजरे,
न हो तू कभी भी उदास,
पूरी हों ख्वाहिशें, दुनिया की
हर ऐय्याशी मुबारक हो/
फिजाएँ खुश हैं, ये चमन,
ये नजारे खुश हैं,
आज की रात आस्मां
औ' सितारे खुश हैं/
झिलमिलाता है चाँद आज,
महफिल में चंदनिया संग,
जितने भी हैं सब एक बेनाम,
सी उल्फत के मारे खुश हैं/
मासूमियत तो देखो,
सभी दुनिया से बेखबर हैं/
एक दूसरे के बने आज,
सभी हमसफर हैं/
लेकिन देखना, खातिर-तवाजह
में कमी कोई होने न पाए,
घरातियों के घरवालियों का
हर मजाक उनपे बेअसर है/
नजर आएगा कोई आज की रात
ये बात मुबारक हो/
ऐ भोली और मासूम दुल्हन
ये रात सलामत हो/
सन्नो बनीं तुम आज सीता
गिरीश राम, ये जोड़ा निराला है,
पिता बृजमोहन ने बड़े
अरमानों से तुमको पाला है/
देख तो लो शोखियाँ महफिल की
चर्ख और सितारे खुश हैं,
जगमोहन ताऊ की आरजू देखो
जो बड़े दिलवाला है/
तुमको अब ताउम्र उस
शऊर का ख्याल रखना है/
चाचा जगबहादुर ने चलना
सिखाते वक्त जो बताया है/
चंदनिया हो तुम अपने
गिरीश चाँद की याद रखना,
कर देना रोशनी गुणों से ससुराल में
गोद में बैठा जो माँ ने सिखाया है
फुलवारी महकती रहे सदा,
जीवन की ये बेला मुबारक हो/
खुश रहो हमेशा तुम
दुल्हा अलबेला मुबारक हो/
स्वागत करते हैं सभी
तुम्हारे पिता, चाचा औ' ताऊ,
भगवती, सतीश औ' राजबहादुर
खुश हैं तीनों भाई/
माला लिए खड़े हैं
कब बन्धुवर तशरीफ लाएँ,
सोचते हैं सब कौन करे
पहले उनसे जुरते- गोयाई/
यूँ तो हर तरफ भी तुम्हें
अदब मद्दे-नजर रखना है,
देखो सन्नो तुम्हें खान्दानी
शान का लिहाज रखना है/
बहनोई सदानन्द, भगवत् प्रसाद
औ' वीरेन्द्र कुमार जी की,
जो मौके पर आए हैं
आवभगत का ख्याल रखना है/
हर साहिल हो तुम्हारा
सागरे- उल्फत की मौज मुबारक हो/
ऐ भोली और मासूम दुल्हन
तुझे तेरा ये होश मुबारक हो/
प्रसन्नता का पारावार नहीं
ये फिजा लगती है सावन सी,
तेरी कोठी भी नजर आती है
आज नई-नवेली दुल्हन सी/
मौजों का ठिकाना न पूछो
खुशियों का आलम न पूछो,
ये झिलमिलाती बत्तियाँ
लगती हैं बिलकुल शबनम सी/
नई सुबह को आज अहसास
कितने दिल में मेरे उपजे हैं/
अच्छे घर तू जाए औ' खुश रहे
यही तो मेरे सपने हैं/
तेरे दिल में यूँ ही तमन्नाओं का
दीया जलता रहे हमेशा,
उनके लिए खुद को कर दे
तू कुर्बान, जो तेरे अपने हैं/
ये मेरे अत्युत्तम उपदेशों का
गुलदस्ता मुबारक हो/
ये सुबह, ये शाम औ' ये रात
हर सितारा मुबारक हो/
जहनों में देखो रोशनी है
औ' बातों में सबके सादगी है,
तब्बसुम है रुख्सारों पे
रूहों में सबके ताजगी है/
पुरनम आँखों से पिता
कऱ्यादान कर रहे हैं,
और भी जितने हैं सबके
चेहरे पे इजहारे- बंदगी है/
आए हैं सभी लेकर बारात
तुम्हारे दर पर,
सभी आएँ हैं सज-धज कर
तुम्हारे घर पर/
सभी की ख्वाहिशें हैं
खाएँगे, पिएँगे, मौज मनायेंगे,
लुत्फ उठाएँगे सभी
आज की दावत में बैठ कर/
तुम भी खाओ, पियो शौक से
ये दावत मुबारक हो/
दिल की धड़कन मुबारक हो
थोड़ी घबराहट मुबारक हो/
विदाई की घड़ी है
आहे- फितरते- आश्नां जागी है,
सुकूने दिल को रुखसत करके,
रिश्तों की ममता जागी है/
शायर की कलम रुकने लगी
गायक की आवाज भराई है,
मगर दुल्हे गिरीश के होठों पे
इक नई रोशनी जागी है/
मौसमे- गुल से चमन में
हर तरफ खुशी छाई है,
हँसते हैं कँवल, खिलते हैं गुलाब,
जूही शरमाई है/
दो प्रणयी राहे- मंजिल पे
आज जो बढ़ चले हैं,
सन्देश मधुमय जीवन का
ये मस्तानी बहार लाई है/
हल्के तब्बसुम से सजती हुई
ये दुनिया मुबारक हो/
ऐ भोली और मासूम बुल्हन
गीत की कड़ियाँ मुबारक हो/
धरती चिहुँक उठी
नभ लेता अंगड़ाई है,
मन के सुनहले- वितान पे
रंग- बिरंगी बदली छाई है/
देखो उफनने लगा है
अब प्यार का सागर,
देखो सांध्य गगन की लाली
सबके अधरों पे मुस्काई है/
यही है आरजू न कभी
चाँद को कोई बदली घेरे,
बादे- सबा के हमेशा यूँ ही
चलते रहें झकोरे,
ये करके प्रार्थना ईश्वर से
" सुहागन रहे तू सदा"
देते हैं तुम्हें आज बिदाई
सभी रिश्तेदार तुम्हारे/
सबको स्वभाव से रिझाने का
ये फित्न मुबारक हो/
ऐ भोली और मासूम दुल्हन
ये' रत्न' मुबारक हो//
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गुलदस्ता- ए- अशआर
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मैं हूँ, तू है साकिया! ये रात जवां है,
मेरी नजर में तेरा हर अफसाना नया है/
आजा आज की रात, मेरे पास आजा,
कह दे तेरी आँखों का क्या बयां है//
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मेरी खुशियों पे जाने क्यूँ वो जले जाते हैं,
मेरे जूठे जाम को जाने क्यूँ वो पिये जाते हैं/
उनमें गर इतनी खानी है, तो उसे खींच लें,
नाहक मुझसे वो दुश्मनी निभाए जाते हैं//
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मुझे ऐ जाने- करार, हर घड़ी तेरा ख्याल रहता है,
तुझसे बातें न कर पाने का मलाल रहता है,
तू ही सनम मिलने की कोई सूरत निकाल,
वरना हर घड़ी हाल मेरा बेहाल रहता है//
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शायर का दिल बहुत रंगीन होता है,
इक अदा पर मामला संगीन होता है,
माशूक ने जो की थोड़ी सी जफा,
उनका दिल बहुत गमगीन होता है//
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ये वो घड़ी है, जब तुम्हारी याद आती है,
आती भी है तो बेहिसाब याद आती है,
तुझे भूलने की सोच भी नहीं सकता मैं,
हर घड़ी मुलाकात की याद आती है//
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जबसे मुझे तुमसे प्यार हुआ है,
दिल मेरा तबसे बेकरार रहता है,
तुम्हारा हाल क्या है नहीं मालूम,
मुझे हर घड़ी तेरा इंतजार रहता है//
राजीव रत्नेश
1972 ई०
मुठ्ठीगंज, इलाहाबाद
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