जो गजल लिखने का सामान कर गई/
हम कुछ समझ न सके,
और बात बढ़ कर आप तक आ गई
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सवाल चाय का था या बेदारी का/
जवाब तो सिर्फ धड़कनों ने दिया था/
राजीव रत्नेश
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" मेरी rachnaaye हैं सिर्फ अभिव्यक्ति का maadhyam , 'एक कहानी samjhe बनना फिर जीवन कश्मीर महाभारत ! "
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