दिल्ली के प्लेटफार्म पर जब उनकी पायल छनक गई//
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समंदर बड़ा सही, पर मछली ही उसकी जान है/
' रतन' के लिए तो बस उसका महबूब ही जहान है//
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कलम आपकी, दर्द आपका और
सोज- ए- बयां भी आपका/
मैं तो बस आईना हूँ, जिसमें झलकता
है सारा जहां आपका//
राजीव रत्नेश
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