Saturday, May 9, 2026

दिल्ली के प्लेटफार्म पर जब ( शेर)

पहाड़ो की ऊँचाई और वादियों की धुन फीकी पड़ गई/
दिल्ली के प्लेटफार्म पर जब उनकी पायल छनक गई//

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समंदर बड़ा सही, पर मछली ही उसकी जान है/
' रतन' के लिए तो बस उसका महबूब ही जहान है//

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कलम आपकी, दर्द आपका और
           सोज- ए- बयां भी आपका/
मैं तो बस आईना हूँ, जिसमें झलकता
            है सारा जहां आपका//

          राजीव रत्नेश
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ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!