Monday, June 29, 2026

तेरे रास्ते में न भँवर आया ( गजल )

तेरे रास्ते में न भंवर आया  ( गजल)
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तूने खूब मुझे पासे- वफा में इंतजार कराया/
जानती थी कभी न मुझे तेरा इंतजार भाया/

आने को सुब्ह कह के शाम तक भी नहीं आईं,
किस दुनिया में रहती हो, मुझे समझ न आया/

कहती हो जन्म-जन्मांतर से ही तुम मेरी हो,
झूठा तेरा वादा, वक्ते- शाम तुझे ख्याल आया/

करामाती तेरा हुस्ने- बेमिसाल, मैं समझता हूँ,
लिबासे- शरर में भी तुझे गले से लगाया/.

हसरते- इश्क जाने कहाँ दफन हो गई चमन में,
तुम्हें बुलाया अकेले, तो साथ सारा जहाँ चला आया/

मजबूर मैं हूँ तो तू भी कम बहानेबाज नहीं,
तेरी फिक्रो- रजामंदियाँ क्या न कभी न जान पाया/

खड़े-खड़े मेरे पाँव बोझल हुए बस स्टैंड पर,
न तू आई, न कोई संदेशा लेकर तेरा यार आया/

वक्ते- विसाल तू इश्क के उबाल से महरूम थी,
मैं ही डर गया जमाने से, कुछ कहने से बाज आया/

किस तरफ चली है, किधर को है तेरा रास्ता
गले में डाल कर दुपट्टा, तुमने फंदा क्यों बनाया/

चली नसीमे- सहर, चमन में पेश तुझे गुलाब किया,
तुझसे गुफ्तगू करूँ या अपलक निहारूँ, खूब इंतजार कराया/

मेरी मुहब्बत कुर्बान तेरे हुस्नो- जमाल पर ,
तू आई न फिलहाल, वक्त तेरा हमसाया बना/

मकतबे- इश्क का तू औराके- मस्त तो है,
तू ही बता, तुझे अपनी मर्जी से बुलाने का सहल रास्ता क्या/

मुहब्बत के भी पेचो- ताब तो हैं, तेरी जुल्फों की तरह,
आई तो हो गुल्शन में, कभी अपना वायदा याद न आया/

कल रात खिड़की खोल, खला में क्या तलाशती थी,
क्यूं तेरे मुखड़े पर हवाइयाँ उड़ीं, कौन था तुझे पहचानता/

इश्क करने का भी करीना होता है, हर आशिक जाने,
तुमने इश्क को बेजार समझा, मैं तेरे हाथ न आया/

इरादा किया था, ले जाऊँगा तुझे चाँद के पार,
वहाँ की धूल- माटी में मुझे भुलाना होगा आसां/

गम इसका नहीं, भूल गया मुझे सारा जमाना,
गम है इसका, तूने भी मुझे नहीं पहचाना/

जहरे- गम मुझे पिलाया और खुद आबाद रही,
मीठा- मीठा गप्प किया, कड़वा मेरे हिस्से में आया/

प्यास है सदियों की तेरी, दागे- दिल जाता नहीं,
तूने साथ छोड़ा पर सफीना मेरा साहिल पे आया/

' रतन ' को खुद अपना होश नहीं, कैसे तूने अपना रास्ता बदला,
तेरे रास्ते में न भँवर आया, न दरिया ने तुझे रास्ता बताया//

                 राजीव रत्नेश
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तीरे- नजर तूने दिल में उतार दी,
मुस्कराहटें अपनी दिल के पार कर दीं/
अब क्या मदहोश करने की सोची है,
धड़कनें अपनी मेरी सांसों के पास कर दीं//

                  राजीव रत्नेश
           """""""""""""""""""""""""""

" बसस्टैंड पर जिसका इंतजार करते करते
पैर बोझल हो गए थे,
आज उसी की धड़कनें रतन की साँसों का
हिस्सा बन गई हैं/"/

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