Monday, July 13, 2026

रतन मुस्करा रहा होता ( गजल )

तुम्हारी जद में आया न होता,
जो पेंग तुमने बढ़ाया न होता/

घायल न हो जाता इस तरह,
निशाना नजरों का बनाया न होता/

अपने-आप से भी बिछड़ा न होता,
दिल को तुमने बहलाया न होता/

किसी मोड़ से ये दर्द न हमराह बनता,
वादा अगर तुमने निभाया न होता/

सुकून तो अपनी ही दुनिया में था मुझे,
काश! मुझे ख्वाब तुमने दिखाया न होता/

' रतन ' आज भी मुस्करा रहा होता,
गर इश्क ने तेरे यूँ आजमाया न होता/

            राजीव रत्नेश
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