उसमें भी आने लगे हैं पत्तियाँ और फूल
बागबां ने यूँ कतार से क्यारियाँ सजाई हैं
धुनक भी शरमाए देख कर रंगबिरंगे फूल
गुलाब लगे हैं खुशबू देने नरगिस ने आँखें झपकाई हैं
हमारी निशानी बागोचमन किस तरह चमकाई है
आके सराह दे बागबां को ही कम से कम एक बार
किस तरह छाँटी हैं पत्तियाँ किस तरह काटी है घास
हर तरफ छाया घनघोर अंधियारा है
तेरे चिरागेयाद का ही रह गया अब सहारा है
आजा जिन्दगी में फिर से लेकर शुआए माहताब
फसलें लहलहा उठें टहनियों को दें फूल पेड़ों को पात
मिलने को तुमसे करने को फरियाद रतन बेताब
लौटाई न जाएगी सितारों की घर आई बारात

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