रखा नहीं कभी कोई हिसाब
मेरे पुराने शहर में वो भी हयात
नये ठिकाने पर मैं भी हयात
जिन्दगी की जंग न वो हारे न हम
किया हमने इस्तेमाल दिमाग
ख्यालों में आए तड़पाते रहे सारी रात
उसके हालात उसके ख्यालात
राजीव रत्नेश
" मेरी rachnaaye हैं सिर्फ अभिव्यक्ति का maadhyam , 'एक कहानी samjhe बनना फिर जीवन कश्मीर महाभारत ! "
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