Friday, May 30, 2025

पुराने शहर में वो नए ठिकाने पर मैं (शेर)

कहाँ से शुरू करें और कहाँ खत्म
रखा नहीं कभी कोई हिसाब
मेरे पुराने शहर में वो भी हयात
नये ठिकाने पर मैं भी हयात
जिन्दगी की जंग न वो हारे न हम
किया हमने इस्तेमाल  दिमाग
ख्यालों में आए तड़पाते रहे सारी रात 
उसके हालात उसके ख्यालात
      राजीव रत्नेश

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