Friday, May 30, 2025

ऊपर ऊपर तैरती मेरी गजलो को बुनियाद दे (शेर)

शाम को हल्की फुल्की बरसात में भींगने की आदात दे
ऊपर ऊपर तैरती मेरी गजलों को गहरी बुनियाद दे
मुझे रस भरे अल्फाज दे खुद गजल कहने की औकात दे
तेरे हुस्न पे शायरी करूँ अपनी मेहरबानी का दान दे

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ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!