नआ पाएगी कभी फिर से बहार
मौसम का मिजाज बदल गया अचानक
लगता है मुझे तुम हो थोड़ी तुनुक मिजाज
हाल मेरा तुमसे ज्यादा बेहतर कौन जाने
कौन जाने कली और मँवरे का प्यार
पाकर तेरा साथ छोड़ना नहीं चाहता हाथ
इसलिए किए तुम्हारे सारे बंधन स्वीकार
मेरे अनजाने ही जाग उठा था दिल में दर्द
तुम्हारे साथ मौसम भी हुआ बेदर्द
हालेदिल समझ या भूलना तू बेहतर जान
यह छोड़ा तुझ पर कुछ तो समझ नादान
क्या जानूँ तेरे दिल की हलचल को
जब तक कर न खुद बयान
अपनी बेकरारी को मिटा दूंगा
हट जाऊँगा छोड़ कर महफिल का जंजाल
समंदर की लहरें अब भी सर उठाती हैं
करती हैं मेरे गीतों का आह्वान
मछलियाँ सतरंगी लेती उछाल
आकर साथ कर दे मुझे मालामाल
मेरी डगमगाती किश्ती का नाखुदा है तू
हाथ में मेरे नहीं अब कोई पतवार
आ जा खुद ही साहिल पे करा दीदार
मंगल अमंगल अब सब तेरे हाथ
मेरे ख्वाबों को न कर मिस्मार
चल दे शतरंज की कोई माहिर चाल
प्यादे को बढ़ा दिया है आगे मैंने शय दे
चाहे तो वजीर बढ़ाकर देदे मात
मुझको नहीं जीत हार की खुशी या मलाल
करता हूँ सबको दुआ और सलाम
किश्ती भँवर में फँसेगी तो फँसे
लगता नहीं ऐसा जब तक तू आजाद ख्याल
क्षणे रुष्टा क्षणे तुष्टा रुष्टा तुष्टा क्षणे क्षणे
मुझे लगता कुछ ऐसा तेरा व्यवहार
करना रखवाली मेरे बागिया की ऐ माली
इसके पहले कि प्राण कर . जाएँ प्रयाण
तेरी रहगुजर का मैं अकेला फिरता दरवेश
मेरी दुआएँ सदा रहेंगी तेरे साथ
जब तक सलामत रतन चाहना तो निभाना
कुछ न कर पाओगे ऐ जमाने मेरे जाने के बाद

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