सपने में भी न करूंगा तुझे याद
संसार की तरह बहते समन्दर में भी
किश्ती पुरानी में भी चला रूँगा पतवार
दिल में तेरे प्यास मुहब्बत की हो नहो
आँखें हैं तेरी पहले से ही रतनार
गिरफतारे मुहब्बत हो तुम भी
जानने वाले जानते हैं समझते हैं समझदार
पहले मेरे प्यार का हिसाब कर दे
फिर चुकाती रहना सबका उधार
ये सफर कटेगा अकेले कैसे
नहीं कोई दुआ भी अपने पास
कर लें थोड़ी पूजापाठ धर लें ध्यान
साथ बिताई जिन्दगी का करें ख्याल
हम तुम साथ चलें चलें ऋृषिकेश
नहा आएँ गंगा घूम लें हरिद्वार
आ जा कि सताता है मुझे तेरा प्यार
भूल गया हूँ तेरा लाड दुलार
पहलू में आके थोड़ी दिल में जगह देदे
चौकस हैं तेरे चंपई बदन के साजो सामान
सहराओं की गूंज में तब्दील हुआ
शहर का हमारे पूछ न हाल
एक ही राह के राही हम दोनों
आ जा दिल्ली छोड़ शहर इलाहाबाद
तेरे पास ले दे के
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लब खुश्क हैं तेरी आँखों में पानी है,
तेरे पास ले दे के यही मेरी निशानी है/
हैरान न हो, मिल जाने दो पानी से पानी को,
पानी से ही तो जिन्दगी की कहानी है//
राजीव रत्नेश
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