मैं भी हासिल- ए- वक़्त हो जाऊँगा
---- राजीव रत्नेश
ओझल, आँखों की ओट हुआ जब तेरा नूरानी चेहरा,
दिल तड़प उठा, दूर हुआ जब मुहब्बत की निशानी चेहरा/
हथेलियों पर मेरे होता था अक्सर वो चाँद- सा चेहरा,
छोड़ गया सहरा में तन्हां मुझको, बेसहारा चेहरा/
आतिशी होंठों की हरारत मेरे होंठों को न मिली,
हाथों से कब फिसल गया मेरा वो सलोना चेहरा/
फितरत मेरी न बन सकी कभी भी चाहत तेरी,
आँखों में बसता है अब भी वही तेरा सुहाना चेहरा/
मुहब्बत मेरी ठिठुर गई है निष्ठुर सर्द हवाओं से,
दर- ब- दर हुआ जाने कहाँ, छुप गया तेरा मासूम चेहरा/
हम भूल ही न जाएँ कहीं सूरत भी अबकी तेरी,
आ जा इक बार ही सही, दिखा जा आबी चेहरा/
झुरमुटों से लपकेंगे हाथ मेरी गर्दन की तरफ,
आखिरी पल के पहले आ जा, लिए गुलाबी चेहरा/
खुरदुरे और खोखले बरगद का सहारा लेकर मिल,
कुछ दिनों बाद मैं भी देखूँगा तेरा जर्द चेहरा/
भागते मंजरों ने जिस्म को बस आँख भर छोड़ा,
मैं भी हासिल- ए- वक़्त हो जाऊँगा, सिसकता रहेगा चेहरा/
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