महफिल में रोशनियाँ कौंधेंगी ( गजल)
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कल लेकर सनम सपनों की बारात आएँगे/
सुब्ह आएँ, शाम आएँ, यूँ ही याद सारी रात आएँगे/
उनको देख दिल तड़पता है, उनके प्यार से,
हाथों में प्याला भर कर वो शराब लाएँगे/
ढूँढ़ेंगे शहर का कोना-कोना, मेरी तलाश में,
नहीं पाया गर, हर कहीं इश्तहार लगवाएँगे/
वो ढूँढंगे मुझे हर कहीं, जल्वा- ए- खुदा है,
कल मुझसे मिलने मेरे घर, मेरे दिलदार आएँगे/
बागों में कलियाँ भी होंगी, गुले- बहार भी होंगे,
वो मुझे वो नग्मा- ए- दिले- खुशगवार सुनाएँगे/
शिकवा भी होता है उनका अदाकारी से सना,
बहार लेकर आएँगे, खुशियों के आबशार लाएँगे/
सुहानी रूत में मेरी खुशबयानी पर वो शरमाएँगे,
सावन में आने का वादा करके, गुलाब लाएँगे/
मुहब्बत के मेरे खास किरदार वही तो हैं,
गर्मी में मेरे साथ घूमने वो नैनीताल जाएँगे/
मुहब्बत की बारीकियाँ भी मुझे वही बताएँगे,
दीवाली में लेकर फुलझड़ी, अनार छुड़ाएँगे/
सामने' रतन' के महफिल में रौशनियाँ कौधेंगी,
हाथों में लेकर सुराही, जब नजरों से जाम पिलाएँगे//
राजीव रत्नेश
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