' रतन' के आँगन में फिर दीवाली यादगार बनाएगा/
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अँधेरों की बिसात ही क्या,
जब उम्मीद का सूरज साथ हो/
हर रात एक दीवाली है,
जब हाथ में कलम, सामने चाँद हो//
राजीव रत्नेश
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" मेरी rachnaaye हैं सिर्फ अभिव्यक्ति का maadhyam , 'एक कहानी samjhe बनना फिर जीवन कश्मीर महाभारत ! "
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