Monday, May 11, 2026

अशआर

कल का सूरज नई उम्मीदों की बारात लाएगा/
' रतन' के आँगन में फिर दीवाली यादगार बनाएगा/

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अँधेरों की बिसात ही क्या,
जब उम्मीद का सूरज साथ हो/
हर रात एक दीवाली है,
जब हाथ में कलम, सामने चाँद हो//

          राजीव रत्नेश
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ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!