देखो तो हाल तेरा किस कदर हुआ,
दामन तेरा काँटों से ही भर गया।
ज़िंदगी के फ़लसफ़े में पहला दर्जा तुझे दिया,
ख़ता मुझसे ही हुई, तुझी पे मर गया।
न शिकवा है, न गिला, न मैं हूँ ख़फ़ा,
तेरे हक़ में आज भी बस मेरी दुआ।
जिस मोड़ पर तू मुझसे हुई थी जुदा,
उसी मोड़ पर ठहरा है मेरा पता।
फूल बिछाए थे राहों में मैंने तेरी,
काँटों को तूने ही अपना चुना।
जो दीप जलाया था तूने उम्मीद का,
आँधियों में भी रहा वो रौशन सदा।
हार कर भी "रतन" ने किसी से न कहा,
ज़ख़्म सीने में रखा और हँसकर जिया।
शब्दार्थ
हाल: दशा, हालत
दामन: आँचल, झोली
फ़लसफ़ा: जीवन-दर्शन
तरजीह: प्राथमिकता, ऊँचा स्थान देना
ख़ता: भूल, ग़लती
गिला / शिकवा: शिकायत
ख़फ़ा: नाराज़
जुदा: अलग
रौशन: प्रकाशित

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