Tuesday, July 14, 2026

उसका भरोसा मत करना ( गजल )

उसका भरोसा मत करना  ( गजल )
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दिल वालों से फरेब के सिवा कुछ नहीं मिलता/
इसीलिए खिलौनों से ही दिल बहलाया करता/

नजदीकी यार- दोस्तों से बात करते सहमा रहता,
जाने कौन सा फरेब नहीं उनके जेहन में समाया रहता/

मुहब्बत की तजरबेकारियाँ कुछ काम नआई,
उनकी मुहब्बत में तो गम का ही सरमाया रहता/

कहाँ तक कहूँ उनकी दरियादिली- ए- फरेब,
हर बार कुछ न कुछ गुल नया नया ही 
दिल तो खिलौनों से भी बहल जाया करता/

खुद मुहब्बत ने भी इसी बात की तसदीक की,
जिसके दिल न हो, वो किसी को फरेब नहीं दिया करता/

उसकी अँगड़ाइयों में मुझे तो फरेब का साया नजर आता,
इसी तरह वो मुझे तड़पा-तड़पा कर आजमाया करता/

जानता- समझता हूँ कि दिलफरेब सायों से तस्कीन नहीं होगी,
असल के खिलौनों से अब तो दिल नहीं बहलाया करता/

उसकी आँखों के काजल के साथ गाल पे बह लेता हूँ,
वह कौन सा काजल लगाता है, बतलाया नहीं करता/

मुहब्बत की रानाइयाँ, मुझे तो लगती हैं ऊल-जुलूल,
कौन सी बात है, जो वो मुझसे छिपाया नहीं करता/

मेहमानों के आने पर खातिर-तवाजह वो करता है,
बाजार से क्या सामान मँगवाया है, बताया नहीं करता/

मैं भी कहाँ उसके चारे में आकर अटक गया,
कांटे में क्या फँसाया था, मुझे पता नही चलता/

मेरी आबाद- मुहब्बत का बस इतना ही फसाना है,
सिमटे तो दिले- आशिक, फैले तो जमाना नहीं बनता/

मुहब्बत की बारीकियों से खुद उलझा- सुलझा किया,
फरेब जान कर भी उससे करते किनारा नहीं बनता/

अलमस्त जवानी चंदा की, शेरो- सुखन मेरे उसके नाम,
मेरी हिकायतों में उसको किसी किरदार का आसरा नहीं रहता/

बातें उसकी यकीनन शीरीं, लहजा खालिस हिन्दुस्तानी,
उसके होंठों पर अपने होंठ रखे, मुझे चाशनी का मजा
नहीं मिलता/

गरज अपनी अब तो तू भी समेट ही ले ' रतन ',
उसका भरोसा मत करना, वो किसी कायदे का वायदा
नहीं करता/

            राजीव रत्नेश
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