उसका भरोसा मत करना ( गजल )
+++++++++++++++++++++++
दिल वालों से फरेब के सिवा कुछ नहीं मिलता/
इसीलिए खिलौनों से ही दिल बहलाया करता/
नजदीकी यार- दोस्तों से बात करते सहमा रहता,
जाने कौन सा फरेब नहीं उनके जेहन में समाया रहता/
मुहब्बत की तजरबेकारियाँ कुछ काम नआई,
उनकी मुहब्बत में तो गम का ही सरमाया रहता/
कहाँ तक कहूँ उनकी दरियादिली- ए- फरेब,
हर बार कुछ न कुछ गुल नया नया ही
दिल तो खिलौनों से भी बहल जाया करता/
खुद मुहब्बत ने भी इसी बात की तसदीक की,
जिसके दिल न हो, वो किसी को फरेब नहीं दिया करता/
उसकी अँगड़ाइयों में मुझे तो फरेब का साया नजर आता,
इसी तरह वो मुझे तड़पा-तड़पा कर आजमाया करता/
जानता- समझता हूँ कि दिलफरेब सायों से तस्कीन नहीं होगी,
असल के खिलौनों से अब तो दिल नहीं बहलाया करता/
उसकी आँखों के काजल के साथ गाल पे बह लेता हूँ,
वह कौन सा काजल लगाता है, बतलाया नहीं करता/
मुहब्बत की रानाइयाँ, मुझे तो लगती हैं ऊल-जुलूल,
कौन सी बात है, जो वो मुझसे छिपाया नहीं करता/
मेहमानों के आने पर खातिर-तवाजह वो करता है,
बाजार से क्या सामान मँगवाया है, बताया नहीं करता/
मैं भी कहाँ उसके चारे में आकर अटक गया,
कांटे में क्या फँसाया था, मुझे पता नही चलता/
मेरी आबाद- मुहब्बत का बस इतना ही फसाना है,
सिमटे तो दिले- आशिक, फैले तो जमाना नहीं बनता/
मुहब्बत की बारीकियों से खुद उलझा- सुलझा किया,
फरेब जान कर भी उससे करते किनारा नहीं बनता/
अलमस्त जवानी चंदा की, शेरो- सुखन मेरे उसके नाम,
मेरी हिकायतों में उसको किसी किरदार का आसरा नहीं रहता/
बातें उसकी यकीनन शीरीं, लहजा खालिस हिन्दुस्तानी,
उसके होंठों पर अपने होंठ रखे, मुझे चाशनी का मजा
नहीं मिलता/
गरज अपनी अब तो तू भी समेट ही ले ' रतन ',
उसका भरोसा मत करना, वो किसी कायदे का वायदा
नहीं करता/
राजीव रत्नेश
""""""""""""""""

No comments:
Post a Comment