Tuesday, July 14, 2026

अभी तक तो तेरी हवेली की ( गजल )

अभी तक तो तेरी हवेली की  ( गजल )
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तू साज है मैं तेरी आवाज हूँ/
तेरे लिए मैं एक जज्ब- ए- खास हूँ/

अंदाजे- महफिल हूँ, माहौले- जश्न हूँ,
साकी के लिए मैं मुरादे- खास हूँ/

तिश्ना- लब हूँ, मुझे तो तेरी ही प्यास है,
आजा पास, तेरे बिना उदास ये रात है/

दिल की आवाज हूँ, दर्दे- खास हूँ,
तू क्यूँ हैरान है, मैं तेरा सब्रे- खास हूँ/

दिल वालों की महफिल में आ गया हूँ,
उमड़ते दिल के दर्दों का अहसास हूँ/

गौरे- तमन्ना हूँ, तेरी मजलिस की बात है,
तेरी हर मतलबे- खास में तेरी ही बात हूँ/

मोहब्बत की कहूँ कि नफरतों की कहूँ,
अपने से जुदा, अपने ही दिल का दाग हूँ/

हैरान हूँ, पशेमान हूँ, क्या बात तुझ में खास है,
नदामत के हैं पलकों में आँसू, लर्जा हर आवाज है/

मुहब्बत की बातों से नावाकिफ था अभी तक,
वैसे तो मैं राँझे, महीवाल से ज्यादे परीशान हूँ/

किस गली में लाई ' रतन ' को ये मुहब्बत भी,
अभी तक तो तेरी हवेली की हसीं शाम हूँ/

           राजीव रत्नेश
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