Saturday, July 18, 2026

अशआर

(१) मेरी नदामत उसकी पलकों पे सजी थी,
उसने चेहरा भी अपना छुपाया था/
     उसके चेहरे पर गमगीनी छलक रही थी,!
हाले- दिल मैंने मैंने उसको सुनाया था//

(२) मिला मौका तोआप से आदाब बजा लिया/
       इसी बहाने हमने दुनियादारी निभ दिया/

(३ ) गमे- दिल की बात है, रहे- आम तक न पहुंचे/
       तेरी मेरी बात है, सरे- दरबार तक न पहुंचे/
       मेरी मुफलिसी की तुझे कानो- कान खबर न हो,
       किसी हाल ये बात तेरे बाप तक तक न पहुँचे//

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ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!