Tuesday, September 22, 2026

तुझसे दूरी अब अखरती है----- गजल

तुझसे दूरी अब अखरती है
        ---- राजीव रत्नेश

तुझसे दूरी अब अखरती है,
खामोशी तेरी मुझे खलती है/

तेरे लिए दिल में हसरतें हैं,
कोई तमन्ना नहीं सँवरती है/

सावन के पड़े झूले हैं, लेकिन,
साथ आकर तू पेंग बढ़ाती नहीं है/

बारिश में जंगली फूल खिले हैं,
कली दिल की मगर खिलती नहीं है/

फस्ल- ए- आरजू लहलहा रही है,
आजा, मिलने की बारी तेरी है/

रात ढलती है, नींद आती नहीं,
तेरी यादों में रात कटती है/

तेरे बिन मेरा मकाँ भी सूना है,
हर तरफ एक उदासी रहती है/

लिखता हूँ कि अबकी अकेला हूँ,
तुझसे दूरी समझदारी नहीं है/

रतन, इतना तो अब समझ ले तू,
दूर रहना भी कोई मजबूरी नहीं है//
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