Friday, October 30, 2026

गुमनामियों का गिला नहीं हरगिज गजल

गुमनामियों का गिला नहीं हरगिज़
  गजल---- राजीव रत्नेश " रतन "

भूमिका:
यह गजल मुहब्बत और जमाने की टकराहट की दास्तान है/
गुल और बुलबुल, जो उर्दू शायरी में इश्क के सबसे पुराने
प्रतीक हैं, यहाँ उन प्रेमियों की जगह खड़े हैं, जिन्हें समाज ने
उम्र- कैद सुना दी है/ कफस( पिंजरा ) बंदिशों का प्रतीक है,
तीरंदाज और संगसार जमाने की सख्ती के/ पर शायर हार नहीं मानता/ वह सवाल उठाता है कि किस कानून या मजहब में
मुहब्बत जुर्म लिखी है और अंत में ऐलान करता है कि गुमनामी
का उसे कोई गिला नहीं, वह पुराने उसूलों से टकराकर एक नई
राह बनाएगा/ वह जानता है कि " मौज-मस्ती के दिन बीत चुके,
अब बंदिशों से टकराने का वक्त है/" गजल का मिजाज बागियाना
है, दर्द के साथ हौसला भी है/

गजल

उम्र भर की कैद- ए- बा- मशक्कत, जीने की उम्मीद के लिए,
गुल-ओ- बुलबुल बाग में थे, बस मुहब्बत की ताईद के लिए/

छोड़ दें राह- ए- वफा और कफस में काटें बाकी उमर?
बुलबुल पूछे गुल से," क्या हम मिले थे इस सजा-ए- शदीद के लिए?

कफस तोड़ें तो तीरंदाजों के निशाने पर हैं हम, बचें तो संगसार,
हर तरफ पत्थर सजे हैं, दुश्मनों की ईद के लिए/

किस कानून- ओ- मजहब में लिखा है, मुहब्बत एक गुनाह है,
मकतब- ए- इश्क में हर सजा माफ है, इश्क के मुरीद के लिए/

हम मुहब्बत भी करेंगे, ये कफस भी तोड़ेंगे हम,
जी रहे हैं हम फकत उस एक दिन की दीद के लिए/

जिम्मेदारियाँ हमारी भी हैं, समझते हैं समझने वाले,
पर दो- रोजा मुहब्बत में कहाँ बचता वक्त मजीद के लिए/

वो दिन लद गए, जब खलील मियाँ उड़ाया करते थे फाख्ता,
अब बंधन किसी को भाता नहीं, लाख हो ताकीद के लिए/

समझ जा ऐ जमाने, हम बाज न आएँगे, इतना याद रख,
रास्ता खुला रखना, इश्क में हर आने वाले शहीद के लिए/

" रतन" को गुमनामियों का गिला नहीं इश्क में हरगिज़,
टकराएँगे पुराने उसूलों से, इक नई जदीद के लिए//

शब्दार्थ
कैद- ए- बा- मशक्कत: कठोर श्रम सहित कैद
ताईद: समर्थन, पुष्टि
राह- ए- वफा: वफा का रास्ता
कफस: पिंजरा, कैदखाना
सजा-ए- शदीद: कठोर सजा
संगसार: पत्थर मार-मार कर दंड देना
मकतब- ए- इश्क: इश्क की पाठशाला
मुरीद: चाहने वाला, अनुयायी
दीद: दर्शन या दीदार
दो- रोजा: दो दिन का, क्षणिक
मजीद: और अधिक
फाख्ता उड़ाना: बेफिक्री के शौक में वक्त बिताना
ताकीद: सख्त हिदायत
शहीद: यहाँ इश्क में जान देने वाला
जदीद: नया, आधुनिक
गुमनामी: अनाम रह जाना
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ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!