Friday, July 23, 2010

निश्चय.....!!!!!

और लोग भले जाएँ
चार काँधे चढ़ के
हम अपनी डगर
खुद पार करेंगे ।

नहीं चाहिए किसी
की मेहरबानी ,
हर सूरत है अपनी,
जानी_पहचानी ।

फिर किस पर
हम नाज़ करेंगे ,
हम अपनी डगर ,
खुद पार करेंगे ।

भले बचपन बीता ,
लाड्ड_ दुलार मे ,
यौवन आया सुकुमार ,
बन कर के ।

बुढापे मे नहीं
त्रास सहेंगे ।
हम अपनी डगर
खुद पार करेंगे ।

बहुत दोस्त हैं कहने
को अपने ,
मौका आने पर
बहाने बनाते ।

हम अविश्वास प्रस्ताव
पास करेंगे
हम अपनी डगर
खुद पार करेंगे ।

सगा नातेदार रिश्तेदार
काम न देगा ,
अपना बेटा ही
दाह कर्म करेगा ।

हम न किसी से
फ़रियाद करेंगे ,
हम अपनी डगर
खुद पार करेंगे ।

जीवन नैया पर
सवार होकर ,
भले दूर जाओ
साथ छोड़ कर,
हम तट को ,
मंझदार करेंगे ।

जीवन की गुलामी
एक त्रासदी है ,
हम ही नहीं
सभी के साथ यही है ।

फिर भी हम यही
बात कहेंगे
हम अपनी डगर
खुद पार करेंगे ।

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