Wednesday, July 7, 2010

जाने क्यों ....?????

अपने गम छुपा कर भी
मुस्कुराता रहता हूं मैं
फिर भी लोग कहते हैं
क्यों गूम्सूम रहता हूं मैं ।

शान मे किसी की
कमी न हो जाये ,
इसलिए सबसे
बा_अदब रहता हूं मैं ।

कोई गालियाँ भी दे
तो खामोश रहता हूं मैं
बेगाने को भी अपना
जान के गले लगता हूं मैं ।

मतलब निकालने को लोग
मतलब रखते हैं ,
गोया की किसी काम
का मुझको समझते हैं ।

मुकद्दर भी कोई चीज़ है
यह तो हर बशर जानता है
असलियत मुकद्दर की
अच्छी तरह समझता हूं मैं ।

उसकी गली मे भूले से
कदम क्या रख दिया
अभी भी अपना दीवाना
समझते हैं वो ।

मुहब्बत भी देखी और
देखी तगाफुल भी
दोनों से बाखबर
बा_ होशियार रहता हूं मैं ।

चले गए दीन_ओ_ईमान भी ,
उनकी मुहब्बत मे
पर अभी भी मुरव्वत से
काम लेता हूं मैं ।

ये झूठे रिश्ते_नाते
कब तक फरेब देंगे
असलियत इनकी
अच्छी तरह समझता हूं मैं ।

1 comment:

Jandunia said...

खूबसूरत पोस्ट