Friday, January 25, 2008

man anmana ho jata hai ..........!!!!!

मन अनमना हो जाता है,
जब तुमसे सामना हो जाता है

वक्त_ऐ_माजी का सिलसिला,
और ख़त्म फ़साना हो जाता है,

हर किसी से कहना हाल_ऐ_दिल,
शायरी हर जज्बा हो जाता है

गुल तोड़ लाये हम गुलज़ार से,
खफा हमसे बागबान हो जाता है

नश्तर से दिल में चुभते हैं ,
हर ज़ख्म हरा हो जाता है

उदास बैठा है तमन्ना _ऐ_जाम से,
खली जब पैमाना हो जाता है

अब बुत की कैसी इबादत,
दिल ही जब बुतखाना हो जाता है

बाद_ऐ_वफ़ा के चलने से,
मौसम और सुहाना हो जाता है

देते है जब_जब वाइज़ नसीहत,
दिल अपना काफिराना हो जाता है

जाम की कहें की साकी की कहे,
हर बज्म मैखाना हो जाता है

अपना न कायनात भर में कोई,
उसूल हर अब पुराना हो जाता है

चले थे कहाँ के लिए "रतन"
अब तो दुश्मन ज़माना हो जाता है !!!!!!!!!!!!

MUDDATO SE TU.................!!!!!!!

मुद्दतो से तू मेरे दिल मे मकीं है,
फ़िर क्यो खानुमा बरबाद करने की सोचे

बमुश्किल तो ये आशियाना बनाया था,
क्यो इसे हवाले तूफ़ान करने की सोचे

हमने माना इश्क हुस्न पे फ़िदा हो गया,
मगर हुस्न क्यो इश्क को शर्मसार करने की सोचे

जिंदादिली राहे उल्फत की मंजिल है,
क्या तू हमसे तर्क_ऐ_इल्तजा को तरसे

ज़माने भर की गर्दिश_ऐ_ इयाम ने सताया,
मगर तुझे ना भुला सके न भुलाने की सोचे

खुर्शीद की जिया है खल्वत क्यो चाहे,
महताब होकर आफताब बेनकाब करने की सोचे

घुंघराले गेसू काँधे पे फैलने को है,
एक दिन साया_ऐ_अरमान बनने की सोचे

सरगोशिया तेरी मुझसे और क्या चाहे,
कदमबोसी कर के तू तर्क_ऐ_वफ़ा करने की सोचे

तेरे फिराक मे शाम_ओ_सहर से बाज़ार हम,
तू क्यो हम ही से इसरार करने की सोचे

महबूब मेरे तुझे इम्तिहान ही लेना है गर,
फ़िर क्यो हमसे सवालात करने की सोचे

निकल पड़ेंगे हम सूए तुर्बत भी अगर,
मेरे जनाजे को बदोश_ऐ_स्वर करने की सोचे

अभी तक तो राज़_ऐ_इश्क पिन्हा है,
तू क्यो इसे आफ्कार करने की सोचे

तेरे दामने मे साड़ी कायनात है मेरी,
क्यो बहिश्त से बाहर करने की सोचे

मिल जाओ कही शहर_ऐ_नामुराद मे,
जुदा दुनिया_ऐ_फनी से बियाबान करने की सोचे

दुनिया के ताना_ओ_मसखरी से बच जाए,
अगर तू "रतन" को पैगाम भेजने की सोचे !!!!!!

HAMAARA AAINAA LE JAAO......!!!!!!

Janni ho gar haqikat ,
Leni ho jo kuch nasihat
Dikhlayegi tujhe asli surat
To hamara aaina le jao…….

Dil me kuch chahat baqi ho,
Kisi ki rahmat baqi ho
Apni tammna naa sawarti ho
Tasveeren ird_gird machalti ho
To hamara aainaa le jaao……..

Kabhi rounak_e_bazm the,
Kitne dilo ke zakhm the
Nairangiya ishq ki khoob
Jalwayen tumhare pur asar the
Waqt ki taaqid par
abHamara aainaa le jaao………

Agar chahte ho masrrat
Dil me ho kisi ki chahat
Ulfat ke diye na jalao,
Bhool jao wo beeti raat
Swapn abhi bhi gar aate hai
To hamara aainaa le jaao………..

Agar chahiye mout se nizat
Aao mil jao hamare saath
Saath mil kar dekhenge
Jo maine dekha hai apne saath
Tumko bhi janna ho "RATAN"
To hamara aainaa le jaao……… !!!!!!!!
Kaate ko gulab,
paani ko shraab likhte hain,
Achhe _bhale ko
khana_khrab likhte hain.

Jis gazal ka unwaan na ho,
Hum us par kalaam likhte hain.
Gar kisi ne chaha maahtaab hona,
Hum husn ko bemisaal likhte hain.

Magrur adaa ho, nazo_nashtar,
Paini nazar ko talwaar likhte hain.
Jigar hamara hai, kaleja unka,
Haadse ko chaak garebaan likhte hain.

Kashti ka zimmedar naakhuda nahi,
Ham lahar ko majhdaar likhte hain.
Subah se shaam, shaam se raat
Safar ko unka intezaar likhte hain.

Mousam badla ya waqt ka mijaz
Kis kadar hum pure armaan karte hain.
Wo puche na puche har haal unkaHum
ba_adab istaqbaal karte hain.

Chaandni me nahaya hua shaffaq badan,
Fir bhi hum aatish_e_aaftaab likhte hain.
Naaz uthana unka hamara kaam nahi,
Fir bhi patjhad ko bahaar likhte hain.

Jaante hain sare aibo_hunar magar,
Unhe khushbu_e_har singar likhte hain.
Mana ruthna uska shokhi se nahi khali,
Us par gazal `RATAN" laazwab likhte hain !!!!!!!

यह तुम्हारा प्यार .!!!!!

यह तुम्हारा प्यार,
जैसे रौशनी की धार
अर्ध विकसित पुष्प में ,
पराग का संचार
याद आया अपरिचित ,
तुम्हारा प्यार.

काल का अनुबंध टूटा
मन हुआ निर्द्वंद
कामना से उत्पन्न भावना
बलहीन सा स्वाछोवास

हो गया जगमग
दुधिया चांदनी मे नहाकर
बरस गए बादल
कुंतल लहराकर
नयन सजीले
अविरल धार.

अत्तल _वितल का
समझ आया अन्तराल
अपना मन प्रतिबंधित
स्वयम जला
बना काजल
बही अश्रुधार.

अकिंचन सी भूल
हृदय का शूल
याद आया
तुम्हारा प्यार,!!!!!!!

आगाज़ .....!!!!!!!!

क्या करेगा कोई इस मोहब्बत के नाम से,
वाकिफ नही हम भी इसके अंजाम से,
खुदा नज़र_ए_बद से बचाए,
तुझे हर हाल मे, हमारा क्या है,
हमने काटे माह_ओ_साल इंतज़ार मी !!!!!!

arsaa_e_zindgi....!!!!!


अरसा_ऐ_जिंदगी गुजरी तेरे इंतज़ार मे,
बाम पर तुम ना आए दिलाने यकीन भी .

खता हमसे हुई जो तुझे बेंतेहन चाहा ,
तुमसे कोई गिला नही किसी सूरत अभी ही.

बरहना_सर घूमती है मौत हम भी तैयार है,
राहों मे मिल जाओ, ना बोलो कभी भी.

शब् को मिले सहर को बिछड़ भी गए ,
दिल ने कहा वह अब भी बैठी है रूठी ही .

बहुत कुछ कहना था अब खामोश हो गए,
अहले ज़माने ने कहा सजी है बज्म तेरी अभी .

कहना आसान है चार लफ्ज़ मुहब्बत के,
उल्फत तुझे आती नही वफ़ा न किया कभी भी.

तेरा किस्सा बयान किया हमने महफिलों में,
भूल जा उस बेवफा को कहने लगे रकीब भी .

कतरा _कतरा लहू टपका आखो से "रतन" ,
कुछ न चाहिए ताज तुझसे मिलने की मर्ज़ी नही !!!!!!