Sunday, June 26, 2011

alag alag tarah

हर एक उठता है लुत्फे-हुस्न अलग अलग तरह 
हसीनों की होती है अदा ए इश्क अलग अलग तरह 

ज़िन्दगी मिसाल बन जाती है औरों के लिए 
हर इक इंसान के लिए अलग अलग तरह ,

जामे-शराब हाथों में लेकर वो बढे आते हैं 
थमाने का अंदाज़ होता है हर बार अलग अलग तरह 

आँखों में उनके बेनाम ग़मों के साए हैं 
ढुलकते हैं अश्क मगर कभी अलग अलग तरह 

गुलाब भी है ,जूही भी,चमेली भी है गुलशन में 
खुशबू मगर वो फैलाते हैं हर बार अलग अलग तरह 

रहजन चलते हैं साथ साथ हमसफ़र के वेश में 
होते हैं इसलिए अन्जामें मंजिल अलग अलग तरह 

नैरंगियाँ ए इश्क से छा जाती हैं फिजा में बहार 
छटा अलग अलग होती हैं ,रंगत अलग अलग तरह 

मंजिले मक़सूद से पहले ख़त्म हो जाती है ज़िन्दगी
होते हैं कुछ लग्जिशे-कदम अलग अलग तरह 

किसी को बरसात भाति है किसी को खटकती है 
मौसम एक होता है ,होती है चाहत अलग अलग तरह 

जितना ही आगे बढ़ो ,दूरी ए मंजिल बढती जाती हैं 
होते हैं कभी कभी फासले अलग अलग तरह 

शायद सफ़र में किसी दरख़्त के पीछे से वो निकलें 'रतन' 
होते हैं ज़िन्दगी में मजे वस्लत के अलग अलग तरह 

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