Saturday, July 20, 2013

MOHABBAT SASTI HO NA JAYE

कहीं   दुश्मनी  में  कमी  हो  न  जाये 
दुश्मनी   कहीं   दोस्ती    हो  न  जाये 

तुम लगाकर ठोकर फिर गले लगाओ 
कहीं इससे मुहब्बत सस्ती हो न जाये 

तुम्हारी मुहब्बत कहीं फिर खेल न खेले 
कहीं दुनिया मेरे लिए अजनबी हो न जाये 

अदा  चित्ताकर्षक  अंदाज़   शायराना 
कहीं   क़यामत   अभी    हो   न   जाये 

मैं   तुमसे   सिर्फ    एक   जाम   माँगू 
कहीं   तुमसे  कजअदाई  हो  न   जाये 

न करो  मुझसे  बातें इस  तरह  सनम 
कहीं ज़माना तुम्हारा मुद्दई हो न जाये  

तोहमतें  मुझपर  तुम्हारी  निशानी  हैं 
कहीं  मौत  ही मेरी जिंदगी हो न जाये 

नफ़रत का जज्बा कहीं खत्म हो न जाये 
कहीं   आतिशेदिल   ठंडी   हो   न   जाये 

चंद महीनों का ही साथ रहा  मेरा  तुमसे 
कहीं  फिर  यह दूरी नजदीकी हो न जाये 

तुमको करीब पाकर मैं पशेमान हो जाता हूँ 
कहीं मेरा साथ तुम्हारे लिए परेशानी हो न जाये 

तुमसे बातें भी करूँ तो अब किस तरह 'रतन'
कहीं फिर मुहब्बत की बदगुमानी हो न जाये 

------------ ----------- ------------ -------------
बर्बादी  ए किस्मत का तमाशा देखा 
न पूछो   इस  दुनिया  में  क्या देखा 
साकी मेरे पास  लाइ  पैगामेउल्फ़त 
मगर दूसरे के  हाथ में पैमाना देखा 
------------- ------------ ------------ ------------- 

No comments: