Tuesday, March 23, 2010

हमी नहीं हैं .......!!!!!


हमीं नहीं कई हैं चाहने वले तेरे

जो तुझे देखते हैं हो जाते है दीवाने तेरे ।

हर किसी से दिल लगा बैठी है तू सनम

हर किसी की जुबां पर है अफ़सोस तेरे ।

आतिशे दिल न बुझी है न बुझेगी कभी

महफ़िल मे हर किसी पे चलते निशाने तेरे ।

सब कुछ सिमट आया है इसी पैकर मे

ये शोखी_ए_गुल , बहार , ये मदमाती हवाए तेरे ।

खुदगर्ज़ ज़माना नहीं बल्कि सिर्फ तू है

सब है तेरे सरगोश फिजा के नज़ारे तेरे ।

ये माना दिल हमारा पहले तुझ पे आया था

बना लिए कई हमराज़ दरम्याने इश्क मेरे तेरे ।

न समझे हैं न समझेंगे ये ज़माने वाले

कब तू कलि से फूल बनी कब हुई हमारे हवाले ।

नज़रों से फिर शम्म_ए_महफ़िल रौशन होगी

जलजले आयेंगे हुस्न पे कुर्बान होंगे परवाने तेरे ।

अफ़साने केस _ओ_लैला , किस्सा_ए_शिरी औ फरहाद

हम मिट भी जाए होंगे ये सारे मरहले तेरे ।

समझाने से तो न समझेगी अहले दुनिया

निकले थे सूयेमक्तल थे कभी जो सपने तेरे ।

सितम आराइयो पे तेरे हमें नाज़ है अब तक

वगरना मिट तो जाते हम भी जैसे परवाने तेरे ।

इन्कलाब सा चमन मे है बागबान परीशां हैरान

कौन आ गया है सर्याद फूल चुनने तेरे ।

यकलख्त एक तीर दिल के आर_पार हुआ

खिंची म्यान से चल दी तलवार सामने तेरे ।

महफूज़ नहीं है जान भी अब तो कसम तेरी

दाम लगा दिया है बाप ने तेरे, गिर्द मेरे तेरे ।

दिल पहले ही दे चुके अब जान बाकी है

अब तो बस ईमान है वो भी हवाले तेरे ।

तेरे सिवा लाचार जिंदगी का कौन सहारा

नाखुदा भी तू है पतवार भी अपने तेरे ।

दरवेश की ये दुआ है ज़माने भर से

हो भीख भी तेरी और कटोरे भी तेरे ।

अभी सफ़र तय भी न हो पाया तू अलहदा

तेरा इस्तकबाल करे जो तू आये अकेले ।

हम तुझे ज़माने भर की नज़रों से छुपा के रखेंगे

अदावत भी मोल लूं जहां से आये ,जो तू आये हरम मे मेरे ।

मैं तुझे चाहता हूं बस तुझी पे मरता हूं 'ताज'

दूसरा कोई सहता क्या 'रतन' ने ज़ुल्म सहे कितने तेरे ।

1 comment:

Udan Tashtari said...

बढ़िया है!