Sunday, March 28, 2010

hothon se jaam ....... !!!!!

होठों से जाम लगा कर हाय हटाया तुमने

भरी महफ़िल मे अपना जलवा दिखाया तुमने ।

सितमगर इतना तो बता क्या मिला तुम्हे

जो इतना हंगामा बरपा किया तुमने ।

एक तेरा गम ऊपर से जुल्मोसितम

ज़माने ने क्या क्या कहर ढहाए हमपे ।

तुम्हारी उल्फत मे हँसे घडी दो घडी

उम्र भर रुलाता रहा तू हमको ।

कितने बवाल है जिंदगानी के

रास्ता गलत बता के दूर हो गया हमसे ।

जज्बातों का बाज़ार गरम किया हमने

उपाए से दिल तोड़ दिया तूने बिना हमसे पूछे ।

कहर बरपा आसमान है आज की रात

तू गया है सफ़र पे बिना हमसे पूछे ।

बरबादिए किस्मत का तमाशा देखा किये

अंजुमन_ए_नाज मे है तू हमसे बिना पूछे ।

वादा शिकन पैमाना तोड़ के क्या मिला

जाम ही न मिलते तो 'रतन' जियेगा कैसे ।

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