Saturday, April 9, 2011

dil pahlu se juda hua

नज़रें मिला के नज़रें चुराना हुआ 
अच्छा है खत्म ये अफसाना हुआ 

दिल लगी दिल्लगी हुई 
उनके हक में जमाना हुआ    

हमसे मोहब्बत हमीं पे इनायत
हमीं से दामन बचाना हुआ 

हसरते उल्फतोकरम न रहा 
जो हुआ वो अच्छा हुआ 

बरबस तो कुछ न था 
पर माहताब क्यूँ छुप गया ?

कुछ समझ न आया
अचानक तुमको क्या हुआ ?

लहरें शांत हो गईं 
ज्वार भाटा न रहा 

कश्ती ए उल्फत डूब गयी 
समंदर को क्या हुआ?

दिलकश अदा जादू ए वफ़ा 
चाँद रोज़ में बुखार उतर गया 

किसी की हालत बिगड़ी 
मगर बीमार तुम्हारा अच्छा हुआ 

जिक्र करते वादा वो वफ़ा का   
पर ख़त्म वो इरादा हुआ 

दिल टूटने की आवाज़ न हुई 
दिल भी अब पहलु से जुदा हुआ 

कुछ गुल थे चमन में जरूर  
हमीं को मगर क्यूँ चुना गया 

काश! तुम्हे वाईज समझाए 
'रतन' क्यूँ कुम्हला गया 

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