दिल का प्याला छलका दिया है ( गजल)
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तेरे दिल की चकमक से रगड़ दिया है दिल,
तपिशे- खूँ- ए- रग और बढ़ाने के लिए,
आ पाए गर जो तू महफिल में मेरे,
आसां किया रास्ता फासला- ए- मंजिल घटाने के लिए/
आजमाइश में तू अब फिर से मुझे न डाल,
तेरे लिए छोड़ा कबूतरों को दाना- पानी देना,
अबकी बरस कर देना आजाद उन्हें भी,
असर- ए- मुहब्बत और बढ़ाने के लिए/
हाले- दिले- बेकरार का अब है आलम जुदा,
देख, न अब तू मगरमच्छ के आँसू बहा,
दामने- दिल तार- तार आखिर हुआ क्यूँ,
दिया था गुलाब, तुझे तो जुड़े में लगाने के लिए/
सागर में इक कश्ती के मुसाफिर हम- तुम,
पीने को भी न मिलेगा यहाँ सादा पानी,
हम - तुम खाक- ए- दिल से करेंगे मुअत्तर,
तेरे घुंघराले केशों को महकाने के लिए/
अब तू छोड़ हठधर्मी और तुनुकमिजाजी भूल जा,
पूछ ले कम से कम एक बार मेरी तबीयत का हाल,
हम तुझे आखिरी छोर तक तेरा साथ निबाहेंगे,
भेजेंगे कासिद को तुझे समझाने के लिए/
दिलदार मेरे! अकेले मसला हल न होगा,
गर्दिश में कश्ती, मारका ऐसे सर न होगा,
मैं बंधन में तो तू है अपनी तबीयत की आजाद,
चाहिए हाथ में तेरा हाथ, जिन्दगी संवारने के लिए/
जमीन ओ' आस्मान के कुलाबे मिलाएँगे तेरे लिए
तेरी राह में फूल बिछाएँगे, तेरी अगवानी के लिए,
आजा एक बार जो तू मेरे दिल की महफिल में,
तर्जे- बयानी झेलेंगे तेरी, अपने अफसाने के लिए/
समंदर में इक बार नहा कर तो देखो,
इक बार मेरी कश्ती में होके सवार तो देखो,
कितना नमकीन है समंदर का पानी,
हम बुलावा देते हैं तुझे साथ नहाने के लिए/
मौजूँ नहीं समझती, इक बार नहा तो सही,
रुख्सारों को चूम कर अहसासे- चरपरा करूँ तो सही,
किस कदर नमकीन हो गई हो पहले से भी,
कोई गरज नहीं तुम्हारी, गुलाबी कपोल छिपाने के लिए/
प्याला उठा, जाम उठा, खोल दे बंद बोतल,
समंदर से आज तक किसी की प्यास बुझी नहीं,
हम इतने गाफिल भी न थे मसाफत में अपने,
मफरूर न थे, आए है खुद ही तुझे ले जाने के लिए/
करीब से करीबतर हर लमहा होगा,
नसीब तुझे चैन- ओ- सुकूँ होगा,
दिल का प्याला और छलका दिया है ' रतन'
तेरी कसक और बढ़ाने के लिए//
राजीव रत्नेश
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