Sunday, July 26, 2026

हकीकते- इश्क इनको ( गजल )

हकीकते- इश्क इनको     ( कविता )
++++++++++++++++++++++

हसीं अक्सर मुजस्सिम बुते- जफा होती है/
सारी कायनात पर अपनी जहाँगीरी रखती हैं/

शोर-शराबे और हंगामें होते हैं पसंद इनको,
खल्वत में इनकी नानी भी मरती है/

जमाने भर को अपना मुद्दई समलती हैं,
आखिरशः किसी से न दिल लगाती हैं/

अपना बना कर, निकम्मा कर के ही बाज आती हैं,
खुद समझती नहीं, प्यार का दाँव लगाती हैं/

अपना समझ कर ही तो इनसे फरेब खाया,
अपने आगे किसी को न कुछ समझती हैं/

मुहब्बत परचून की दुकान का माल समझती हैं,
बिना हींग- फिटकरी लगाए ही चोखा खाती हैं/

हमने भी तो इन्हें दिल से न याद किया कभी,
जानते-समझते थे, ये बरबाद- तबीयत होती हैं/

इश्क का न ये मुकम्मल फलसफा होती हैं,
दिली धड़कता है जरूर, भेजे से सफा होती हैं/

हमने कभी न कहा कि हमसे दिल लगाओ,
छेड़ मुहब्बत का तराना, साजे- वफा तोड़ देती हैं/

मुहब्बत में इनके बरबाद होते-होते आखिर बचे,
काँटे का चारा हजम कर भी मछली नहीं फँसती है/

बरबाद मुहब्बत का फसाना न सुनायेंगे " रतन",
हकीकते- इश्क इनको महशर में समझ आती है

                       राजीव रत्नेश
               """""""""""""""""""

No comments:

About Me

My photo
ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!