तेरी- मेरी जब मुलाकात होगी
राजीव रत्नेश
किसी तरह सुबह से शाम होगी,
तेरी मेरी जब मुलाकात होगी/
मुझ मुसाफिर की नहीं कोई मंजिल,
जहाँ दिन ढलेगा वहीं रात होगी/
सरे- शाम ही दिल धड़कने लगा है,
तेरी दस्तक नहीं, मेरी आवाज होगी/
जहाँ आखिरी मेरी साँस होगी,
इक नए सफर की शुरूआत होगी/
उम्र को सालों में नापना कैसा,
वो ज्यादा से ज्यादा दो-चार साँस होगी/
डाल को एक बार क्या छोड़ा,
ढूँढता हूँ कहीं बरगद की छाँव होगी/
मैं तेरी हर बात याद कर रोता रहा,
तू मेरी ही कहानी की बात करती होगी/
उम्र की तरह जाए तो चाल बदलनी होगी,
वो अब तक शायद मेरे इंतजार में होगी/
शाम की सलीबों पर मेरे नाम से वो,
कोई न कोई तहरीर उकेरती होगी/
दुश्मनों के बीच मुहब्बत रास्ता ढूँढती है,
कितनी कशमकश में मेरी औकात होगी/
मुकद्दर ने साथ दिया तो यकीन कर,
एक ही तट पर हमारी कश्ती साथ होगी/
कल सहरा थी, समंदर होकर बह निकली,
वो भी तो आखिर घर-परिवार वाली होगी/
किसे खबर है, किससे उसका पता पूछूँ,
सिसकते- सिसकते किस तरफ गई होगी/
मुहब्बत के खेल में अपने लिए हार चुनी,
वजह भी न थी कोई तुमसे हार की/
झील में उतरा चाँद ऐ जाने- गजल!
मेरी तुमसे अब कब बात होगी?
रास्ते चाहे जुदा-जुदा हों ' राजीव ' अपने,
दिल में फिर भी वही मुलाकात होगी/
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