Sunday, July 19, 2009

तुम शहर छोड़ गए............!!!!!!

बहुत दिन से तुम शहर छोड़ गए
दीदार को आखें तरसती रहीं
जो रोज़ मेरा दिल बहलाती थी
वो आवाज़ बरसो से सुनी नहीं ।

तेरी रहगुज़र से गुज़रा किए बारहा
निगाह उठते ही नज़र नीची करनी पड़ी
किस बात से खफा है सनम
हमारी कोई गलती भी बतायी नहीं ।

बीत गया पतझड़ सूना सूना ही
शायद बहार मे आने की मर्ज़ी नही
तीरंदाज़ हो सबसे बड़े कायनात में
तरकश से तीर कोई निकला ही नहीं ।

हम तेरे डर पे मर मिटे तो भी
हौसला अफजाई करने तुम आई नहीं
रुसवाई के डर से परदे मे कब तलक
ये भी नही नकाब कभी तुमने उठायी नही ।

हमारा ही जिगर था झेल गए चोट
मिटाने की कोई कसर तुमने छोड़ी नही
हम मुब्तिला थे इश्क मे बा_हुस्न
फ़िर भी दावा तुमको की हरजाई नहीं ।

सहरा ऐ दिल पे न हो पायी बरसातें
तुम हुए गाफिल बात हमने छुपायी नही
किसी सूरत तू सूरत दिखा जा
हमने कभी पत्थर की मूरत बनायी नही ।

सर पे चढ़ जाते तुम और भी ज्यादा
हसीनो मे हसीं हो बात हमने बताई नही
दिल को हर वक्त काबू मे रखता 'रतन'
दीगर तुमसा दूसरा कहीं नहीं कभी नहीं ।


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