बड़ी फरमाबरदार है तू ( गजल)
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तेरे ही सहारे बढ़ चला हूँ, दुनिया के मँझधार में/
मेरे अत्फाल के रस्मो- राह की तू बुनियाद है/
हमारे अज्दाद की निशानी तो तूने ही सँभाली है,
उनके अरमानों के असरार की तू इकलौती आगाज है/
निशानी हमारे प्यार की, तेरी इक-इक नफस में है,
हमारे खान्दानी वसीयत की तू मुस्तकिल आफाक है/
मेरे मुकद्दर की चमकती जिया- स- आफताब तू है,
मकतबी किताबों के वरकों की तू बची निशानात है/
जलजले भी आए, तूफान भी आए, तू न राह से डिगी,
मेरी नसीहतों की ऐ जाने- जहाँ! तू मेरी ऐवाने- ख्वाब है/
कशमकश- ए- गर्दिश में भी हम चलते रहे मंजिल की तलाश में,
तमाशाइयों ने फिकरे कसे जहालत से, क्या करता, तू मेरी ग्रहस्थी, मेरा सामान है/
आगे बढ़ कर शैदाइयों ने कदमबोसी की, तब्सिरा सुन कर,
और कोई क्या कर पाता, तू मेरी ब्याहता हमजाद है/
लहर-लहर में माकूस थी तू, चाँदनी की बागडोर संभाले हुए,
शहरे- आरजू में तू थी गालिब, मेरे लिए तू खुदा का फरमान है/
इबादत तेरी करता हूँ, सुन ऐ नीली आँखों वाली,
महल भले न हों मेरे पर तू मेरी औकात है/
चंचल, शोख हसीना, कितना तरसाएगी' रतन' को,
सीने से लग जा, आजा पास, तू बड़ी फरमाबरदार है/
राजीव रत्नेश
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जिन्दगी में भले न और कोई काम हो/
अस्ल बात तो तब, जब मुहब्बत मेहरबान हो/
वो पिलाएँ जाम, सुराही से ढ़ाल कर,
उनका साथ हो, उनसे आगोश मेरा आबाद हो//
राजीव रत्नेश
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