Tuesday, July 28, 2026

आखिर रतन ने भला तेरा ( गजल )

आखिर रतन ने भला तेरा  ( गजल )
++++++++++++++++++++++

तेरी यादों पर नियंत्रण लगाया है/
तब कहीं जीवन संयमित पाया है/

तू जान न सका, न ही समझा मुझे,
पाकर तुझे मैंने सीप में मोती पाया है/

निर्झर गिरते तेरी आँखों से,
वादियों में प्यार के जल-प्रपात छाया है/

मैं तुझे जान-बूझ कर अनदेखा करता हूँ,
समझ- बूझ कर तूने, लहजा शिकवा का बनाया है/

इस बात का कोई गम नहीं, भूला तू मुझको,
मैंने भी तो इस दिल से मूरत तेरी हटाया है/

साहिल तक ही साथ, तेरा-मेरा था रोज का,
जाकर बस तूने खारे पानी से चेहरा धोया है/

महबूब मेरे अब जाकर किसी से भी शिकवा कर,
वार न तेरा आज तक मुझ पर कहीं चल पाया है/

ऐ गुलबदन! जाने- चमन! शाने- महफिल थे कभी,
तेरे बिना चमन बेनूर, महफिल में गम का साया है/

अंदाज तेरा शायराना, बातें तेरी तिलस्माना,
तेरा फुसूँ मुझ पर तो कभी न तेरा चल पाया है/

बहारों में घूमो, नज्जार- ए- शौक में रहो,
तेरा फन, आखिर किस तरह मुझे भुलाया है/

मजरूह न कभी दिल मेरा, तेरा न मुंतजिर,
सिर्फ तुझे तेरी याद के समंदर से निकाला है/

तेरे होठों पर वो रस- विचुंबित जाम छलक रहा,
सच बता, मेरे सिवा किसी और को पिलाया है/

कहीं न चला जब तेरा जादू , वार मुझ पर किया,
आखिर" रतन" ने ही भला तेरा क्या बिगाड़ा है//

                राजीव रत्नेश
       """"""""""""""""""""""

No comments:

About Me

My photo
ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!