तेरे सिवा किससे प्यार का इरादा करें ( गजल)
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देखा तुझे, चाहा तुझे, अपना भी बनाया तुझे/
तेरी खुशी और गम में, कलेजे से लगाया तुझे/
तूने अपना समझा जहेनसीब! तेरी वफा के कद्रदां,
जब-जब तू रूठी, सारी- सारी रात मनाया तुझे/
मुहब्बत की बारीकियाँ और लाचारियाँ तू जाने,
जहाँ समझ न पाए, सोते से हमने जगाया तुझे
जब जब प्यार तेरे लिए दिल में ज्यादा उमड़ा,
बाहों में भरकर ओ बेखबर! चूमा बेतहाशा तुझे/
प्यार दिया तूने भरपूर, आँखों के वो लबरेज पैमाने,
सारी रात तुझे अपने सामने ही संवारा तुझे/
नशा चढ़ा तेरा कभी मुझ पर से उतरा ही नहीं,
जब तेरी जरूरत महसूस हुई, लगाया आवाजा तुझे/
पेड़ों को शाखें, शाखों को पत्ते, अता जिसने किया,
मेरे चमन के हर शजर को, मौसम का मिला सहारा तुझे/
समंदर में जिसके सहारे मौजें उठती-गिरती रहीं
उसी की इबादत में, मिले समंदर का किनारा तुझे/
कभी भी तुम मुझसे नजरओट होकर कहीं दूर जाना,
हमेशा मेरे सर पर तू अपने आँचल का सायबां संभाले
मौजों के सहारे, जिन्दगी की कश्ती न छोड़ देना,
हम मिल गए हैं, फिर भी साहिल का आसरा तुझे/
अब भला बता किस मछली का हम शिकार करें,
जब भी मेरे करीब तू आती है, लगता मिला कश्मीर का शिकारा मुझे/
खूबसूरत तेरी बाँकी अदा, दिल का तू पक्का यकीं है,
दिल से उठी सरगम से हमेशा बहलाया तुझे/
सात जनम में किस जनम की तू तो मेरी चंदा है,
दिल की आवाज को रतन ने हमेशा सुनाया तुझे
राजीव रत्नेश
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तुम न होते तो हम किससे अपनी बात कहते/
आस्मां के चाँद-सितारों से भी क्या पैमान करते/
दुःख-दर्द अपना बाँटते किससे, तुम्हारे बगैर,
अपनी मुहब्बत का तुम्हारे सिवा किससे ऐलान करते/
राजीव रत्नेश
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