Sunday, December 14, 2008

शीशे का महल......!!!!!!!

शीशे का महल हो ,
और चांदनी रात हो ।

हम तुम साथ हों
और मौसम की बात हो ।

रुपहले बादल हों
आसमानों की बात हो ।

दिल से दिल मिले
भले हमारी आफात हो ।

दिल्लगी भी है ज़रूरी
कुछ मुस्कराहट की बात हो ।

दिल_ऐ_ऐय्यार ने कुछ कहा
तुम्ही से तुम्हारी बात हो ।

अच्छा तो है हम साथ हों
और चांदनी की बारात हो ।

पतझड़ बाग़ मे हो
और फूलों की बात हो ।

हम तुम साथ हों
ज़माना भले ख़िलाफ़ हो ।

असरदार उसी की बात है
"रतन" की मर्ज़ी जिसके साथ हो ।


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