देना अपनी मरमरी बाहों का सहारा ( कविता)
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तेरी मदभरी आँखों में प्यार भरे अफसाने हैं,
घुंघराली अलकों में झूमते सावन के तराने है,
नजाकत- ओ- अदा में तू सबसे बढ़कर है,
डाल दे गले में जरा अपनी मरमरी तू बाहें/
तुझसे अलगाव मेरा कभी हो न पाएगा,
पीकर जाम तेरे हाथों से, सुरूर मुझे आएगा,
बाली उमर में थकान तुझे खुदारा न हो,
बस तू देना जरा, अपनी मरमरी बाहों का सहारा/
गैरों से बात करती हो, तो दिल जलता है मेरा,
दूर भगाने को उसे, दिल उमगता है मेरा,
कोई तुझे तकलीफ दे, नहीं, मैं नहीं सह सकता,
दिल मेरा हल्का करने को, देना अपनी मरमरी बाहों का सहारा/
दिल न तजवीज किया था, लाखों में तुझे,
दिल ने अपना माना था, लाखों में तुझे,
तू मौज- ए- समंदर थी, अगणित लहरों में,
करीब दिल के आना, देना अपनी मरमरी बाहों का सहारा/
जाने क्या लिख डाला था, औराके- हैरानी पे,
माँग बैठा था क्या तुझसे, प्यार की निशानी में,
तू मेरी है और सदा मेरी ही हो के रहेगी,
वुसअते- सहरा में, देना अपनी मरमरी बाहों का सहारा/
दिलदार तूने कहा था, रतनार तुझे मैंने कहा था,
तेरे लिए जमाने के जख्मों का दर्द मैंने सहा था,
कली-कली शोख- चंचल थी चमनो- गुल्जार की,
नकार कर भौंरों की गुंजन, देना अपनी मरमरी बाहों का सहारा/
आने वाली बहारें आके ही रहती हैं जीवन में,
मिलते ही हैं सहारे, मिलने वाले जीवन में,
पतझड़ के जर्द पत्तों में कोई जीवन नहीं होता,
प्यार के सब्ज गुल देकर, देना मुझे अपनी मरमरी बाहों का सहारा/
कंदीले- कुर्बत जला, पास आ कर रूखे- रौशन दिखा,
दिखा अपने चंपई होंठों से फूलों का झड़ना,
ऐ सुब्हे- सीमी! आकर मुझे सोते से जगा,
मुँह धुलाते हुए, देना अपनी मरमरी बाहों का सहारा/
जीने से चढ़ते- उतरते, निगाह अपनी नीची रखना,
रेलिंग के सहारे, मेरे कमरे में अपना जादू दिखाना,
गुलाब मेरे टेबल के गुलदस्ते में अपने हिसाब से सजाना,
गुले- आरिज देकर, देना मुझे अपनी मरमरी बाहों का सहारा/
कुछ तो बात है गजब की, तेरी सूरते- नूरानी में,
उससे बढ़ कर कशिश है, नीली आँखों की गहराई में,
मुर्झाए गुल खिल उठते हैं, तेरी मीठी- मधुर सदा से,
मुझ खाकसार से मिलना तो, देना मुझे अपनी मरमरी बाहों का सहारा//
राजीव रत्नेश
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नूर बरसता है कैसा रुख पे तेरे,
महफिल के उजालों में,
होड़ लग जाती दीवानों में, पहले ही
तुझ तक पहुँच पाने की/
शमां मंद पड़ जाएगी, जानता हूँ,
दिल बिस्मिल है अर्जे- मस्तानी से,
पहले कर मुझे मदहोश,
फिर करना कोशिश शमां के रुबरु होने की//
राजीव रत्नेश
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