Saturday, May 23, 2026

कितआत

वक्त की क्या बिसात
जो उम्र का एहसास दिलाए,
तेरा दिल वो गुले- गुलाब है,
जो रिवजां में भी मुस्कराए//

जमाने के सारे जख्म, सारे दर्द कहीं खो जाते है,
जब हम तेरी मरमरी बाहों के साए में सो जाते हैं,
अरमानों की दुनिया जब दिल में मचलती है,
ठंडक सी मिलती है तेरे दहकते रुख्सारों से//

           राजीव रत्नेश
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