कर सितम जाओ
+++++++++++
राजीव रत्नेश
दूर न बैठो, मेरे करीब--- आ जाओ,
सरशाद हो दिल जागे नसीब-- आजाओ/
तेरी गली से गुजरता हूँ तो दिल कहता है,
आज फिर लौट के मेरे हबीब-- आ जाओ/
मेरी दुनिया से जाकर भी अगर तुम पलट आओ,
तहे-दिल से कहूँगा शुक्रिया---- करीब आ जाओ/
तेरी यादों ते मुझे चैन से रहने न दिया,
अब तो आज, मेरे दिल के नसीब-- आ जाओ/
शिकवा तुमसे नहीं, बस इतनी-सी गुजारिश है,
रूठना छोड़ दो, मेरे करीब--- आ जाओ/
बहुत दिनों से तुम्हें देखने की तमन्ना है,
मेरी आँखों का बन कर नसीब-- आजाओ/
तेरी खूबसूरत- सी याद सताती है मुझे,
मेरी तनहाई के बन जाओ रकीब-- आ जाओ/
तुझसे मिलने की तमन्ना में गुजरती है ये शाम,
मेरी साँसों में उतर कर मेरे करीब-- आ जाओ/
तेरे आने से ही महकेगा मेरा सूना चमन,
मेरी दुनिया के बन के तुम नसीब-- आ जाओ/
रतन, तेरी मेहरबानी रहेगी मुझ पर सदा,
करीब आके मेरे दिल पर कर सितम--- जाओ/
""""""""""""""""""

No comments:
Post a Comment