अपने से पराया बना रखा है
_______ राजीव रत्नेश
अपने हुस्न का तुमने दीवाना बना रखा है,
न जाने किस हसरत से अपना बना रखा है/
मेरे होश की पूछो तो मुझे होश नहीं है,
तुमने मुझे अपनी महफिल का परवाना बना रखा है/
याद करो जमुना किनारे, हम- तुम साथ बैठे थे,
तुमने मेरे पहलू में आँचल ढलका रखा है/
तुम थीं दिलनशीं, तभी दिल में ठिकाना बना रखा है,
तेरी आँखों का जाम कब का चढ़ा रखा है/
मुझे हसरत- ए- आगोश का दीवाना समझ कर,
न जाने किस सूरत मुझे अपना बना रखा है/
तेरी खामोशी भी जाने क्या- क्या कहती है,
तुमने हर राज आँखों में छुपा रखा है/
मैंने चाहा था उम्र भर तेरा होकर रहना,
तुमने क्यों मुझसे ये फासला बना रखा है/
तेरे दर से लौट कर भी तेरा ख्याल आया,
दिल ने तुझे जाने क्या- क्या बना रखा है/
रतन, अब अपने पास बचा ही क्या है,
तुमने मुझे अपने से पराया बना रखा है/
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