Saturday, September 26, 2026

अपने से पराया बना रखा है_____ गजल

अपने से पराया बना रखा है
_______ राजीव रत्नेश

अपने हुस्न का तुमने दीवाना बना रखा है,
न जाने किस हसरत से अपना बना रखा है/

मेरे होश की पूछो तो मुझे होश नहीं है,
तुमने मुझे अपनी महफिल का परवाना बना रखा है/

याद करो जमुना किनारे, हम- तुम साथ बैठे थे,
तुमने मेरे पहलू में आँचल ढलका रखा है/

तुम थीं दिलनशीं, तभी दिल में ठिकाना बना रखा है,
तेरी आँखों का जाम कब का चढ़ा रखा है/

मुझे हसरत- ए- आगोश का दीवाना समझ कर,
न जाने किस सूरत मुझे अपना बना रखा है/

तेरी खामोशी भी जाने क्या- क्या कहती है,
तुमने हर राज आँखों में छुपा रखा है/

मैंने चाहा था उम्र भर तेरा होकर रहना,
तुमने क्यों मुझसे ये फासला बना रखा है/

तेरे दर से लौट कर भी तेरा ख्याल आया,
दिल ने तुझे जाने क्या- क्या बना रखा है/

रतन, अब अपने पास बचा ही क्या है,
तुमने मुझे अपने से पराया बना रखा है/
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