सारे गिले-शिकवे भुला के; तुझे कलेजे से लगाया होता!
तू ही मेरी सात समंदर पार की परी थी;
तुममें अपनी जान न हमने बसाया होता!
( सारे जमाने को ठुकरा कर तुझे अपना बनाया होता)
" मेरी rachnaaye हैं सिर्फ अभिव्यक्ति का maadhyam , 'एक कहानी samjhe बनना फिर जीवन कश्मीर महाभारत ! "
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