जिसकी नाक नहीं; उसकी नहीं कोई औकात!
यहाँ जरा-जरा सी बात पे लोग नाक कटा लेते हैं;
नक्कटों में शामिल हो; जिंदगी भर नकटा कहाते हैं!
सूरत से नहीं; सीरत नाक से होती है;
बिना नाक के पहचान नहीं होती है!
कहाँ तक बयां करूँ नाक की महिमा;
यही जहन्नुम पहुंचाती है; बेड़ा गर्क कराती है!
दीदार करा अपनी; नाक से पहचान करा अपनी;
दीवाना मुझे बना दे; नाक की अपनी!
लोग कभी- कभी अजब हरकत करते हैं;
मासूम सी नाक को मास्क में छुपा लेते हैं!
नाक ही तो हर मौसम का ईमां होती है;
बिना पर्दे केही पर्दे में रहा करती है!
सर्दी-गर्मी सहती है; आजाद- ख्याल होती है;
सबको रहता नाक का ध्यान; नाक सब समझती है!
हर बशर अपने से ज्यादा; नाक की हिफाजत करते हैं;
जानवर तक अपनी नाक को सलामत रखते हैं!
जाने लक्ष्मण भाई जान को क्या सूझी?
सूर्पनखा की सलोनी नाक ही काट डाली!
किसी के चेहरे पे सबसे खूबसूरत उसकी नाक होती है;
आलमे- जवानी में तीखे नाक अंजामे- अदावत होती है!
हम उनकी नाक को देखे बिना एक दिन रह नहीं सकते;
नाक बुनियाद है चेहरे की; हम अच्छी तरह समझते हैं!
राजीव रत्नेश
तेरी नाक है खूबसूरती का खजाना;
नथ के लिए क्या मुझे; तेरा मनाना!
राजीव रत्नेश

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