Thursday, June 5, 2025

मेरे वश में कुछ न रहा( शेर ५)

समंदर बीच शिकारा डूबा; हम जुदा हो गए;
हम किसी किनारे लगे; तुम जाने किस किनारे लगे;
मिलना होगा तो मुक्कदर ही मिलाएगा;
मेरे वश कुछ न रहा; तुम्हारे हाथ कुछ न रहा!

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ROM ROM SE KARUNAMAY, ADHARO PE MRIDU HAAS LIYE, VAANI SE JISKI BAHTI NIRJHARI, SAMARPIT "RATAN" K PRAAN USEY !!!